उन दिनों की परंपरा के अनुसार, जन्म देने का समय आने पर रानी माया और उनके दोस्त तथा परिचारक महल छोड़कर अपने माता-पिता के घर के लिए प्रस्थान किए।
कुछ-ही दूर जाने के बाद, रानी ने विश्राम करने के लिए सबको रुकने को कहा। उन्हें पता था कि शिशु का जन्म जल्द ही होने वाला है। लुंबिनी के सुंदर बगीचों में पहुँचकर रानी ने जन्म देने के लिए कोई आरामदायक जगह ढूंढ़ने लगीं। एक विशाल वृक्ष ने अपनी एक डाल नीचे झुका दी और रानी ने उसे पकड़कर शिशु को जन्म दिया। परिचारकों ने शिशु को अपनी बाहों में थाम लिया और उसकी सुंदरता और शांति देखकर आश्चर्यचकित रह गए।
उसी समय, पूरे देश में शांति और आनंद की भावना फैल गई। लोग अपने सारे संकट भूल गए और आपस में प्रेम और मित्रता का अनुभव किया। आसमान में अचानक इंद्रधनुष प्रकट हुआ। पूरे राज्य में बुद्धिमान लोगों ने इन संकेतों पर ध्यान दिया और अपने आप से कहा, “कोई अद्भुत घटना हुई है। आज अवश्य एक विशेष दिन है।”