बहुत साल पहले, उत्तर भारत के एक छोटे-से राज्य में एक अद्भुत घटना हो रही थी। एक रात, रानी माया–राजा शुद्धोदन की पत्नी–ने एक विचित्र स्वप्न देखा। उन्होंने देखा कि आकाश से एक चमकीली सफ़ेद रोशनी आ रही थी और उस रोशनी में एक शानदार हाथी था। हाथी बिलकुल सफ़ेद था और उसके छह बड़े दाँत थे। रोशनी का यह हाथी रानी की ओर उड़ आया और उसके शरीर में पिघल गया। रानी जाग उठीं और वे अपार खुशी से भरी हुई थीं।
उन्होंने तुरंत राजा के पास गईं और अपने स्वप्न के बारे में बताईं। दोनों ने दरबार के बुद्धिमान लोगों से इस स्वप्न का अर्थ पूछा। उन लोगों ने जवाब दिया, “यह एक उत्कृष्ट स्वप्न है। इसका अर्थ यह है कि महारानी एक बालक को जन्म देने वाली है और यह राजकुमार एक दिन एक महान व्यक्ति बनेगा। केवल आप नहीं, पूरी दुनिया भाग्यशाली है कि महारानी को ऐसा पुत्र मिलेगा।”
यह शुभ समाचार सुनने पर राजा और रानी के आनंद की सीमा न रही। राजा अत्यंत प्रसन्न थे क्योंकि वे एक उत्तराधिकारी चाहते थे जो उनके बाद राज-काज संभाल सके। अब उनकी इच्छा पूरी हो रही थी।
उन दिनों की परंपरा के अनुसार, जन्म देने का समय आने पर रानी माया और उनके दोस्त तथा परिचारक महल छोड़कर अपने माता-पिता के घर के लिए प्रस्थान किए।
कुछ-ही दूर जाने के बाद, रानी ने विश्राम करने के लिए सबको रुकने को कहा। उन्हें पता था कि शिशु का जन्म जल्द ही होने वाला है। लुंबिनी के सुंदर बगीचों में पहुँचकर रानी ने जन्म देने के लिए कोई आरामदायक जगह ढूंढ़ने लगीं। एक विशाल वृक्ष ने अपनी एक डाल नीचे झुका दी और रानी ने उसे पकड़कर शिशु को जन्म दिया। परिचारकों ने शिशु को अपनी बाहों में थाम लिया और उसकी सुंदरता और शांति देखकर आश्चर्यचकित रह गए।
उसी समय, पूरे देश में शांति और आनंद की भावना फैल गई। लोग अपने सारे संकट भूल गए और आपस में प्रेम और मित्रता का अनुभव किया। आसमान में अचानक इंद्रधनुष प्रकट हुआ। पूरे राज्य में बुद्धिमान लोगों ने इन संकेतों पर ध्यान दिया और अपने आप से कहा, “कोई अद्भुत घटना हुई है। आज अवश्य एक विशेष दिन है।”